🌞 सूर्य की भूमिका (Surya Ki Bhumika) —
सूर्य नवग्रहों में सबसे प्रमुख और शक्तिशाली ग्रह माना जाता है। इसे ग्रहों का राजा कहा गया है। यह आत्मा (Soul), आत्मविश्वास, पिता, सरकार, अधिकार, यश, उच्च पद, स्वास्थ्य, ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता का प्रतिनिधित्व करता है।
सूर्य के मुख्य गुण:
आत्मबल और आत्मा का कारक
पिता का प्रतिनिधि
सरकारी नौकरी, राजनीति, प्रशासन
सम्मान, यश, तेज
नेत्रों का स्वास्थ्य
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता
🔺 कुंडली में उच्च का सूर्य —
राशि: मेष राशि (Aries) में सूर्य उच्च का होता है
डिग्री: 10 डिग्री (मेष में)
अर्थ: जब सूर्य उच्च का होता है, तब व्यक्ति में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, सरकारी कार्यों में सफलता, समाज में प्रतिष्ठा, और ऊर्जा अधिक होती है।
ऐसे व्यक्ति जन्मजात लीडर होते हैं और उनकी आभा आकर्षक होती है।
🔻 कुंडली में नीच का सूर्य —
राशि: तुला राशि (Libra) में सूर्य नीच का होता है
डिग्री: 10 डिग्री (तुला में)
अर्थ: जब सूर्य नीच का होता है, तो व्यक्ति में आत्मविश्वास की कमी, पिता से दूरी या मतभेद, सरकारी क्षेत्र में समस्याएं, नेतृत्व क्षमता की कमी, और कभी-कभी स्वास्थ्य समस्याएं भी देखी जाती हैं।
ऐसे व्यक्ति निर्णय लेने में हिचकिचाते हैं।
🌟 विशेष बातें:
सूर्य की महादशा आने पर व्यक्ति को जीवन में नई दिशा मिल सकती है। अगर सूर्य शुभ स्थिति में हो तो यश, मान, प्रतिष्ठा मिलती है।
यदि कुंडली में सूर्य नीच का हो, तो नीचभंग राजयोग या शुभ ग्रहों से दृष्टि होने पर उसका प्रभाव कम हो सकता है।
🕉️ सूर्य के उपाय:
रोज़ सुबह सूर्य को जल चढ़ाएं।
“ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें (11 या 108 बार)।
लाल कपड़े पहनें और गुड़-गेहूं का दान करें।
पिता का सम्मान करें, उनका आशीर्वाद लें।