शुक्र

शुक्र ग्रह (Shukra Grah) की भूमिका —

📌 शुक्र क्या दर्शाता है?

शुक्र ग्रह सौंदर्य, प्रेम, कला, संगीत, विवाह, स्त्री सुख, भोग-विलास, धन, वाहनों, गहनों, सजावट, फैशन और कामुकता का प्रतिनिधि होता है। यह दैत्यों के गुरु माने जाते हैं और जीवन के सांसारिक सुखों से संबंधित सभी विषयों को नियंत्रित करते हैं।

गुणधर्म विवरण
प्रकृति शुभ ग्रह
लिंग स्त्री
दिन शुक्रवार
रंग सफेद
धातु चांदी
शरीर के अंग जननेंद्रिय, त्वचा, गुर्दे, आंखें
संबंध पत्नी, प्रेमिका, कलाकार, गायक, सौंदर्य विशेषज्ञ

🔺 कुंडली में उच्च का शुक्र (Uch ka Shukra):

  • राशि: मीन राशि (Pisces)

  • डिग्री: 27 डिग्री (Pisces में)

  • लक्षण:
    उच्च का शुक्र व्यक्ति को अत्यधिक आकर्षण, कलात्मकता, सौंदर्यबोध, वैवाहिक सुख, विलासिता और ऐश्वर्य प्रदान करता है। ऐसा व्यक्ति विपरीत लिंग को सहज आकर्षित करता है और समाज में उसकी एक विशेष छवि बनती है।


🔻 कुंडली में नीच का शुक्र (Neech ka Shukra):

  • राशि: कन्या राशि (Virgo)

  • डिग्री: 27 डिग्री (Virgo में)

  • लक्षण:
    नीच का शुक्र व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में तनाव, सौंदर्य और प्रेम की कमी, विलासिता की असंतुलित भावना, या शारीरिक रोग ला सकता है। ऐसे व्यक्ति के प्रेम संबंध भी अव्यवस्थित हो सकते हैं।


🌟 शुक्र की महादशा का प्रभाव:

शुक्र की महादशा 20 वर्षों की होती है और यदि शुभ हो तो वैवाहिक सुख, धन, वाहन, विलासिता, प्रेम संबंध, फिल्म, फैशन, कला आदि क्षेत्रों में सफलता देता है।


🕉️ शुक्र को बलवान बनाने के उपाय:

  1. “ॐ शुं शुक्राय नमः” या “ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः” मंत्र का जाप करें।

  2. शुक्रवार को उपवास करें और सफेद वस्त्र पहनें।

  3. सफेद मिठाई, चांदी, चावल, या सुगंधित वस्तुएँ दान करें।

  4. दाम्पत्य जीवन में प्रेम और शुद्धता बनाए रखें।

  5. शिव पार्वती की पूजा करें, इससे वैवाहिक जीवन में संतुलन आता है।

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