💛 पुखराज रत्न की विशेषताएँ (Pukhraj Ratna Ki Visheshatayen)
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रंग (Color) – हल्का पीला से लेकर गहरा सुनहरा पीला।
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रचना (Composition) – यह कोरन्डम (Corundum) खनिज का ही एक प्रकार है, जैसे माणिक और नीलम।
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कठोरता (Hardness) – Mohs Scale पर 9 (हीरे के बाद सबसे कठोर रत्नों में से)।
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चमक (Luster) – कांच जैसी दमक, पारदर्शी या अर्ध-पारदर्शी।
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ग्रह – गुरु ग्रह (बृहस्पति) का रत्न।
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ऊर्जा – ज्ञान, विवेक, समृद्धि, धार्मिकता, विवाह योग, संतान सुख आदि को बढ़ाता है।
⛏️ पुखराज कहाँ से प्राप्त होता है? (Pukhraj Kahan Se Milta Hai)
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श्रीलंका (Ceylon) – सबसे उच्च गुणवत्ता वाला हल्का पीला पुखराज यहीं से मिलता है।
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थाईलैंड – चमकदार लेकिन हल्की क्वालिटी के रत्न।
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अफ्रीका (नाइजीरिया, मेडागास्कर) – मोटे और गहरे पीले रत्न।
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भारत (कभी-कभी मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में) – दुर्लभ और बहुत सीमित।
💰 भारत में पुखराज की कीमत (Pukhraj Ki Kimat in India)
गुणवत्ता | कीमत (प्रति कैरेट) |
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सामान्य | ₹1,000 – ₹5,000 |
मध्यम गुणवत्ता | ₹5,000 – ₹20,000 |
उच्च गुणवत्ता (Ceylon) | ₹20,000 – ₹80,000+ |
एक्स्ट्रा फाइन / Collector’s | ₹1 लाख+ प्रति कैरेट |
👉 नकली पुखराज कांच या रंगे हुए क्वार्ट्ज से बनते हैं — वे बहुत सस्ते होते हैं।
🧑⚖️ कौन पहन सकता है पुखराज? (Kaun Pahan Sakta Hai Pukhraj)
✅ उपयुक्त जातक (Kundali ke Anusar):
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जिनकी कुंडली में गुरु ग्रह शुभ भावों (2, 5, 9, 10, 11) में हो।
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धनु (Sagittarius) और मीन (Pisces) राशि वाले।
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जिनके जीवन में विवाह विलंब हो रहा हो, संतान प्राप्ति में बाधा हो, या शिक्षा में रुकावट हो।
❌ कब न पहनें:
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यदि गुरु 6, 8, या 12वें भाव में हो या शत्रु ग्रहों से पीड़ित हो।
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मिथुन, कन्या, तुला राशि वालों को ज्योतिष सलाह से ही पहनना चाहिए।
🩺 पुखराज के शारीरिक लाभ (Sharirik Labh)
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यकृत (Liver) और पाचन – पाचन तंत्र को मजबूत करता है।
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शरीर की गर्मी और कमजोरी – शरीर को ऊर्जा और मजबूती देता है।
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महिलाओं में हार्मोन संतुलन – प्रजनन, संतान और मासिक धर्म की समस्याओं में लाभकारी।
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मानसिक शक्ति – एकाग्रता, ज्ञान और निर्णय क्षमता बढ़ाता है।
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संतान और विवाह में देरी – इन समस्याओं के लिए यह उत्तम रत्न है।
🛐 कैसे पहनें (Pehanne Ki Vidhi)
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धातु – सोना सबसे उत्तम।
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अंगुली – तर्जनी (Index Finger) दाएं हाथ में।
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दिन और समय – बृहस्पतिवार सुबह 6 से 8 बजे के बीच।
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मंत्र –
ॐ बृं बृहस्पतये नमः (108 बार जाप करें)