🟡 गुरु ग्रह (Guru / Brihaspati) की भूमिका —
📌 गुरु क्या दर्शाता है?
गुरु ग्रह को ज्योतिष में “गुरु”, “बृहस्पति”, या “देवगुरु” कहा जाता है। यह ज्ञान, धर्म, नीति, गुरु, संतान, विवेक, शिक्षा, संस्कार, धन और भाग्य का कारक है।
गुणधर्म | विवरण |
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प्रकृति | शुभ ग्रह |
लिंग | पुरुष |
दिन | गुरुवार |
रंग | पीला |
धातु | सोना |
शरीर के अंग | जिगर (liver), वसा (fat), ज्ञान चक्षु |
संबंध | गुरु, आचार्य, शिक्षक, संतान, धर्मगुरु |
🔺 कुंडली में उच्च का गुरु (Uch ka Guru):
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राशि: कर्क राशि (Cancer)
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डिग्री: 5 डिग्री (Cancer में)
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लक्षण:
उच्च का गुरु व्यक्ति को धार्मिक, न्यायप्रिय, ज्ञानी, भाग्यशाली और परोपकारी बनाता है। ऐसा व्यक्ति समाज में सम्मानित होता है और उसे अच्छी संतान, धन और शिक्षा प्राप्त होती है।
🔻 कुंडली में नीच का गुरु (Neech ka Guru):
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राशि: मकर राशि (Capricorn)
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डिग्री: 5 डिग्री (Capricorn में)
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लक्षण:
नीच का गुरु व्यक्ति को धार्मिकता से दूर, दंभी, झूठा या मूर्ख बना सकता है। ऐसे व्यक्ति को शिक्षा में बाधा, गुरुजनों से दूरी, या संतान संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं।
🌟 गुरु की दशा और प्रभाव:
गुरु की महादशा में यदि वह शुभ हो, तो व्यक्ति को धन, भाग्य, उच्च शिक्षा, विवाह और संतान सुख की प्राप्ति होती है। यह 16 वर्ष की लंबी महादशा देता है।
🕉️ गुरु को बलवान बनाने के उपाय:
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“ॐ बृं बृहस्पतये नमः” या “ॐ गुरवे नमः” का जाप करें।
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पीले कपड़े पहनें, गुरुवार को उपवास रखें।
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चने की दाल, पीले फूल, पीली मिठाई, या सुनहरा वस्त्र दान करें।
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गुरु या ब्राह्मणों का सम्मान करें, उन्हें भोजन करवाएँ।
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गाय को चारा दें, खासकर गुरुवार को।